Gayatri Jayanti 2026: गायत्री जयंती 2026: जानें तिथि, महत्व, पूजा विधि और गायत्री मंत्र की महिमा

गायत्री जयंती सनातन परंपरा का एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पर्व है। यह दिन मां गायत्री की उपासना, ज्ञान की साधना और विचारों की शुद्धि के लिए विशेष महोत्सव माना जाता है। मां गायत्री को वेदमाता कहा जाता है, क्योंकि उन्हें वेदों में निहित ज्ञान, प्रकाश और सद्बुद्धि का स्वरूप माना गया है। उनकी आराधना केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि स्वयं को बेहतर बनाने की एक प्रक्रिया है।


Gayatri Jayanti 2026


वर्ष 2026 में गायत्री जयंती गुरुवार, 25 जून को मनाई जाएगी। यह दिन ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी के साथ पड़ रहा है। इस अवसर पर श्रद्धालु प्रातः स्नान करके मां गायत्री की पूजा करते हैं, गायत्री मंत्र का जाप करते हैं और अपने जीवन में सत्य, अनुशासन तथा सकारात्मक विचार अपनाने का संकल्प लेते हैं।

यह पावन अवसर मनुष्य को अपने ज्ञान, व्यवहार और निर्णयों पर गंभीरता से विचार करने की प्रेरणा भी देता है।

गायत्री जयंती 2026 की तिथि

गायत्री जयंती 2026 गुरुवार, 25 जून को मनाई जाएगी। कई परंपराओं में यह पर्व ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इसी दिन निर्जला एकादशी भी रहेगी।

गायत्री जयंती पर सुबह पूजा, मंत्रजाप, हवन और दान किया जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में इसे मनाने के नियम बदल सकते हैं। इसलिए स्थानीय पंचांग और परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा करना उचित है।

गायत्री जयंती का महत्व

मां गायत्री को ज्ञान और चेतना का स्वरूप माना गया है। उनकी उपासना मनुष्य को सही और गलत के बीच अंतर समझने की प्रेरणा देती है। यह पर्व बताता है कि ज्ञान का अर्थ केवल अधिक जानकारी प्राप्त करना नहीं है।

वास्तविक ज्ञान व्यक्ति के व्यवहार में दिखाई देता है। वह मनुष्य को विनम्र, जिम्मेदार और संवेदनशील बनाता है। इसलिए गायत्री जयंती का दिन विद्यार्थियों, शिक्षकों और साधकों के लिए विशेष माना जाता है।

इस अवसर पर मां गायत्री से एकाग्रता, समझ और सही निर्णय लेने की शक्ति मांगी जाती है। साथ ही अपने ज्ञान का उपयोग समाज के हित में करने का संकल्प भी लिया जाता है।

मां गायत्री का स्वरूप

देवी गायत्री को ब्राह्मण के समस्त अभूतपूर्व गुणों का प्रतिरूप माना जाता है। देवी गायत्री को हिन्दु त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) की देवी के रूप में भी पूजा जाता है। उन्हें समस्त देवताओं की माता तथा देवी सरस्वती, देवी पार्वती एवं देवी लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। मां गायत्री को प्रायः पांच मुख और दस भुजाओं के साथ दिखाया जाता है। उनके पांच मुख ज्ञान और चेतना के अलग-अलग रूपों का प्रतीक माने जाते हैं।

उनका वाहन हंस है। हंस विवेक और सत्य-असत्य की पहचान का प्रतीक माना जाता है। मां गायत्री का शांत स्वरूप बताता है कि सच्चा ज्ञान व्यक्ति के भीतर अहंकार नहीं, बल्कि धैर्य और करुणा पैदा करता है।

कैसे हुआ माँ गायत्री का जन्म

पुराणों के अनुसार, एक बार भगवान ब्रह्मा को एक पवित्र यज्ञ करना था, जिसके लिए उनकी पत्नी देवी सरस्वती की उपस्थिति आवश्यक थी। लेकिन सरस्वती देर से आईं। यज्ञ को समय पर पूरा करने के लिए ब्रह्मा ने इंद्र से एक उपयुक्त वधू खोजने का अनुरोध किया। 

इंद्र को एक ग्वाइन मिली जिसे ब्रह्मा ने गाय (गया) के बीच से गुजारकर शुद्ध किया। उसका नाम गायत्री रखा गया । ब्रह्मा ने उससे विवाह किया और उसने यज्ञ संपन्न कराया। बाद में यह ज्ञात हुआ कि गायत्री स्वयं सरस्वती का अवतार थीं।

गायत्री जयंती की पूजा विधि

गायत्री जयंती के दिन सुबह उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें। पूजा स्थान को साफ करके चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाएं। इसके बाद मां गायत्री का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें।

हाथ में जल लेकर पूजा और मंत्रजाप का संकल्प लें। मां गायत्री को जल, चंदन, अक्षत, फूल, धूप, दीप और फल अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर कुछ देर शांत बैठें।

इसके बाद गायत्री मंत्र का 11, 21 या 108 बार जाप करें। मंत्र बोलते समय जल्दबाजी न करें। शब्दों का स्पष्ट उच्चारण करें और उनके अर्थ पर ध्यान दें।

मंत्रजाप के बाद मां गायत्री की आरती करें और फल या मिठाई का भोग लगाएं। पूजा पूरी होने पर प्रसाद बांटें। अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, कपड़े या उपयोगी सामान दान कर सकते हैं।

गायत्री मंत्र और उसका अर्थ

ॐ भूर्भुवः स्वः।
तत्सवितुर्वरेण्यं।
भर्गो देवस्य धीमहि।
धियो यो नः प्रचोदयात्॥

गायत्री मंत्र में परम दिव्य प्रकाश का ध्यान किया जाता है। इसके माध्यम से प्रार्थना की जाती है कि ईश्वर हमारी बुद्धि को सही दिशा दें और हमें अच्छे कर्म करने की प्रेरणा प्रदान करें।

गायत्री मंत्र का जाप साफ और शांत स्थान पर करना चाहिए। सूर्योदय के समय इसका जाप करना अच्छा माना जाता है। जाप के दौरान मन को शांत रखते हुए मंत्र के भाव पर ध्यान देना चाहिए।

नियमित मंत्रजाप से मन को एकाग्र रखने और अनुशासित दिनचर्या अपनाने में सहायता मिल सकती है। इसे किसी समस्या के तुरंत समाधान के रूप में नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अभ्यास के रूप में अपनाना चाहिए।

गायत्री जयंती पर क्या करें?

गायत्री जयंती पर सुबह या शाम गायत्री मंत्र का जाप करें। कुछ समय ध्यान में बिताएं और अच्छी पुस्तकों का अध्ययन करें। विद्यार्थी अपनी किताबों और अध्ययन सामग्री का सम्मान करें।

जरूरतमंद बच्चों को कॉपियां, पुस्तकें, पेन या दूसरी शिक्षा सामग्री दी जा सकती है। इसके अलावा भोजन, पानी और कपड़ों का दान भी किया जा सकता है।

इस दिन अपनी दिनचर्या और आदतों पर भी विचार करें। समय का सही उपयोग करने, सत्य बोलने और क्रोध पर नियंत्रण रखने का संकल्प लें। माता-पिता, गुरु और शिक्षकों का सम्मान करें।

गायत्री जयंती पर क्या न करें?

गायत्री जयंती के दिन झूठ बोलने, निंदा करने और विवाद में पड़ने से बचें। मन में क्रोध, ईर्ष्या और द्वेष रखने के बजाय शांत रहने का प्रयास करें।

इस दिन मांस, मदिरा, नशा और तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए। व्रत रखते समय स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है। गर्भवती महिलाओं, बीमार लोगों और नियमित दवा लेने वालों को कठोर उपवास से बचना चाहिए।

पूजा और मंत्रजाप को दिखावे का माध्यम न बनाएं। साधना का उद्देश्य दूसरों से बेहतर दिखाई देना नहीं, बल्कि अपने विचार और व्यवहार सुधारना है।

गायत्री जयंती का संदेश

आज के समय में जानकारी प्राप्त करना आसान है, लेकिन सही निर्णय लेना उतना ही कठिन हो गया है। गायत्री जयंती ज्ञान के साथ विवेक रखने का संदेश देती है।

मां गायत्री की पूजा हमें अपनी बुद्धि का उपयोग सही कार्यों में करने की प्रेरणा देती है। शिक्षा तभी उपयोगी होती है, जब वह व्यक्ति को ईमानदार, जिम्मेदार और दयालु बनाए।

इस दिन किसी जरूरतमंद विद्यार्थी की सहायता करना, किसी को पढ़ाना या सही मार्गदर्शन देना भी ज्ञान के दान का रूप माना जा सकता है।

निष्कर्ष

गायत्री जयंती 2026 गुरुवार, 25 जून को मनाई जाएगी। यह दिन मां गायत्री की पूजा, गायत्री मंत्र के जाप और ज्ञान के सम्मान का अवसर है।

इस पर्व का वास्तविक उद्देश्य केवल पूजा करना नहीं, बल्कि अपने विचारों और कर्मों को बेहतर बनाना है। मां गायत्री का संदेश है कि ज्ञान का उपयोग सत्य, न्याय और मानव कल्याण के लिए किया जाए।

गायत्री जयंती पर मंत्रजाप करें, जरूरतमंदों की सहायता करें और अपने जीवन में अनुशासन, विनम्रता तथा सद्बुद्धि को स्थान दें।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. गायत्री जयंती 2026 कब है?

गायत्री जयंती 2026 गुरुवार, 25 जून को मनाई जाएगी। कई परंपराओं में यह ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है।

2. गायत्री जयंती क्यों मनाई जाती है?

यह पर्व मां गायत्री के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्हें ज्ञान, विवेक और सद्बुद्धि की देवी माना जाता है।

3. गायत्री जयंती पर क्या करना चाहिए?

इस दिन मां गायत्री की पूजा, गायत्री मंत्र का जाप, ध्यान और दान किया जाता है। जरूरतमंद विद्यार्थियों को शिक्षा सामग्री देना भी शुभ माना जाता है।

4. गायत्री मंत्र कितनी बार जपना चाहिए?

अपनी क्षमता के अनुसार गायत्री मंत्र का 11, 21 या 108 बार जाप किया जा सकता है। संख्या से अधिक जरूरी शांत मन और स्पष्ट उच्चारण है।

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